Keep on shouting, "hindu - muslim", Jai UP, Jai Bihar, Jai Maharashtra, Jai Telangana, jai Karnataka, Jai Gandhi, Jai Ambedkar, Jai Subhash, Jai ye, jai vo.
Dengue se bachne bhar ki bhi democratic achievement nahi kamaa paayi hai ham sabne 68 years after independence.
क्या इतने वर्षों में प्रश्न करना भी नहीं सीख पाया भारत? नेता जी लोग (बहुत सारे) तो ये कहते हैं की भारत एक महान जनतांत्रिक देश है. लेकिन फिर भी अभी तक किसान आत्महत्या कर रहे हैं.
इतना सफल जनतंत्र कि अभी तक राजनीतिक पार्टियों में दागी नेता हैं, और उनको कोई सजा भी नहीं मिलती.
इतना सफल जनतंत्र कि सड़क पे गड्ढे के कारण दुर्घटना होती है, मोटरसाइकिल चालक की पत्नी की मृत्यु हो जाती है, और बंगलुरु पुलिस किसी सरकारी लापरवाहियों या भ्र्ष्टाचार को दोषी न कह कर उल्टा मोटरसाइकिल चालक को ह्त्या के अपराध में दोषी बोलने लगती है!!!!
इतना सफल जनतंत्र कि अभी तक राजनीतिक पार्टियों में दागी नेता हैं, और उनको कोई सजा भी नहीं मिलती.
इतना सफल जनतंत्र कि सड़क पे गड्ढे के कारण दुर्घटना होती है, मोटरसाइकिल चालक की पत्नी की मृत्यु हो जाती है, और बंगलुरु पुलिस किसी सरकारी लापरवाहियों या भ्र्ष्टाचार को दोषी न कह कर उल्टा मोटरसाइकिल चालक को ह्त्या के अपराध में दोषी बोलने लगती है!!!!
अभी भी समय है, ये आपके साथ भी हो सकता है. आँख खोलिये और ध्यान से प्रश्न करिये.
एक साड़ी खरीदने में तो सब इतना सोचते हैं, सेलेक्ट करते हैं, निगोशिएट करते हैं, सलाह लेते हैं, एक मोबाइल फ़ोन खरीदने में तो रिश्तेदारों, दोस्तों, और/या इंटरनेट को इतना पूछते हैं. किसी के बहकावे में ना आते हुए अपनी तरफ से संतोषजनक प्रयास करते हैं की हमारा निर्णय सही हो. लेकिन जब हम चुनाव में वोट देते हैं और अपना नेता/ प्रतिनिधि चुनते हैं तो ये सब कुछ क्यों नहीं करते? क्यों मीडिया द्वारा फैलाई गयी हवा, या धर्म या जाति, या झूठी जुमलेबाजियों के चक्कर में पड़कर लापरवाही से वोट देते हैं?
परचून की दुकान से, या फिर फ्लिपकार्ट के ऑनलाइन स्टोर से, हर जगह यही प्रयास करते हैं कि, कुछ छूट मिल जाये, हमारा धन बर्बाद ना हो. पर जब भ्रष्टाचारी हमारे और हमारे भाई, पिता आदि के द्वारा परिश्रम से कमाए गए धन लूट लेते हैं, वो धन जिसे हम इनकम या सेल (वैट) आदि टैक्सों माध्यमों से हमारी उन्नति के लिए सरकार को देते हैं, तब हमें उतना तो दुःख नहीं होता जितना हमें परचून की दूकान पर २ रुपये के घाटे से हो जाता है.
आज वो सड़क के गड्ढे के कारण अपने पत्नी को खो बैठा।।।। एक मिनट! उसने तो अपने सारे डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्सेज भरे थे इस जनतंत्र में.
तो?
तो कल आपके साथ भी अगर ऐसा कुछ हो जाए तो फिर सिर्फ अपने आप को ही कोसियेगा। और किसी को नहीं।
प्रश्न करना सीख लीजिये।
खैर नीचे लिंक है इस दुखद घटना के समाचार की.
http://khabar.ndtv.com/news/india/bangalore-wife-died-due-to-pit-road-and-police-charged-killed-against-her-husband-1219439?pfrom=home-moretop
http://khabar.ndtv.com/news/india/bangalore-wife-died-due-to-pit-road-and-police-charged-killed-against-her-husband-1219439?pfrom=home-moretop
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