सौरभ कुमार एक साधारण सा इमानदार अधिकारी मारा जाता है और किसी को कोई फर्क नहीँ पड़ता | हम कैसे देश की आशा मेँ जी रहे हैँ?
मैँ कल लखनऊ से मुंबई विस्तार एयरलाइंस में आ रहा था मेरे बगल मेँ बैठे हुए एक युवा उद्यमी से मेरी बातेँ हुई | वह स्क्रैप का कारोबार करते हैं, जिसमें उनको बड़ी - बड़ी कंपनियोँ से खराब सामानोँ को उठाना होता है, अाैर फिर वो उनमेँ से अलग - अलग धातुओं को अलग - अलग करके आगे बेच देते हैं। उंहोंने बताया कि वह बड़ी - बड़ी कंपनियोँ से ठेके ले चुके हैँ। जब मैने उनसे पूछा कि क्या उन्होनें कभी भारतीय-रेल से भी ठेका लिया है, तो उन्होंने साफ कह दिया, "बिल्कुल नहीँ! भारतीय रेल से ठेका लेना बहुत ही "रिस्क" का काम है।" फिर उन्होंने कहा कि, "नहीँ - नहीँ बिजनेस के मामले मेँ कोई रिस्क नही, जान का रिस्क है।" आज ही मुझे अपनी फेसबुक न्यूज फीड में यह समाचार मिला जिसने उनकी इस बात की पुष्टि भी कर दी भी कर दी।
आपसे साझा कर रहा हूं।
आपसे साझा कर रहा हूं।

No comments:
Post a Comment