Friday, September 30, 2016

Surgical Strike | सर्जिकल स्ट्राइक

वाह भाई! गज़ब है खेल कुर्सी का। भारतीय राजनति में अभी बड़े साहब ने मस्त निर्णय लिया, इससे बहुत से लाभ हुए हैं। ईमानदारी से बोले तो मुझे भी सर उठाने का अवसर मिला है। अब देखियेगा बहुत से अंध-प्रजातंत्री संतुष्ट हो चुके होंगे और बड़े साहब के सारे गुनाह माफ़ कर लेंगे। अब देखते हैं कि छोटे साहब क्या करते हैं। उनके विधायकों पर जितने झूठे केस हुए थे सबके लिए अब सिर्फ हवा जिम्मेदार होगी। अंध-प्रजातांत्रियों से अब उन सब बातों से कोई लेना - देना नहीं होगा। व्यापम हो या ऑगस्टा कोई अंतर नहीं पड़ता। भाई देश लोकपाल से थोड़े ही चलता है, तभी तो अभी तक नियुक्ति ही नहीं हुई है। २०० रूपये प्रति किलो दाल अगर जाती है तो वो भी रिकॉर्ड ही है, बुरा क्यूँ मानेंगे! जो स्वराज, जेटली, सुरेश प्रभु और नायडू जैसे बड़े-बड़े दिग्गज नहीं कर पाए, वो पार्रिकर के विभाग ने कर दिया। अब तो कदाचित बहुतों के लिए राष्ट्र का सर्वांगीण विकास हो चुका होगा।
जो हम ६० वर्षों में नहीं कर पाए, वो बड़े साहब ने २ वर्षों में कर लिया। कल से सब स्वच्छ हो चुका होगा, हाँ और क्या! ना कोई शिकायत ना कोई मांग। जो लोग अभी भी नहीं समझ रहे हैं, वो अपने आप को भरोसा दिला लें कि उनके बैंक खातों में १५ लाख की राशियां आ चुकी हैं, उनके यहाँ बिजली सस्ती हो चुकी है, क्योंकि गुजरात की भाँति देश भर में सूर्य ऊर्जा छा चुकी है। जिन्हें लगता है कि गुजरात में ऐसा नहीं हुआ है वो दुश्मन मुल्क चले जाएँ। चिंता ना करिये, वहां का वीजा बड़े साहब के ही कुछ गण लोग देते हैं।
कदाचित बहुत से मित्रों को मेरा बड़े साहब के लिए ऐसा प्रेम अच्छा ना लगे। उन्हें मैं बस इतना ही कहूँगा की मित्रों मुझे दुश्मन मुल्क ना भेजो, मुझे तो बड़े साहब बहुत अच्छे लग रहे हैं।