Saturday, December 5, 2015

ब्राह्मणवाद - जातिवाद । Brahmanism - Casteism


मैं सनातनी हूँ, मैं ब्राह्मण हूँ, मैं हिन्दू भी हूँ. ये ब्राह्मणवाद कौन सा नया पाप है? मैंने तो बचपन से लेकर के अभी तक कोई भी भेदभाव नहीं किया जाति के आधार पर. मैं स्वयं को ब्राह्मण इसलिए नहीं कहता हूँ क्यूँकि मैं जन्म के आधार पर एक ब्रह्मण परिवार में हूँ, अपितु मैं इसलिए स्वयं को ब्राह्मण कहता हूँ क्यूँकि मैं कर्म से एक शोधकर्ता एवं एक छात्र हूँ. और मेरे सभी साथी जो मेरे साथ शोध कर रहे हैं वो भी इसी प्रकार से ब्रह्मण ही हैं, भले ही वो किसी भी परिवार में जन्म लिए हो. ब्राह्मणों का एक महत्वपूर्ण कर्त्तव्य धर्म की रक्षा है. मुझे ये ज्ञात है की जन्म-परायण-जातिवाद ने मेरे धर्म को कलुषित किया है. अतः एक ब्राह्मण होने के नाते मैं जन्म-परायण-जातिवाद का घोर विरोधी हूँ, और कर्म-परायण-जातिवाद को ही महत्व देता हूँ. यह मेरा ब्रह्मणवाद है, और ऐसा ही वास्तविक ब्रह्मणवाद होता है और होना चाहिए।
मैं यह स्वीकार कर सकता हूँ कि ब्रह्मणवाद के पीछे से बहुत से लोग समाज में कुरीतियों को पोषित करते रहे हैं, किन्तु यह कदापि स्वीकार नही कर सकता हूँ कि ''ब्रह्मणवाद'' शब्द ही अपने में नकारात्मक है. अब बहुत से "बुद्धिजीवी" वर्ग के लोग "श्रमजीवियों" को नीचा देखते हैं. इसका अर्थ ये हो सकता है कि नीचा देखना बुरी बात है और वो जो नीचा देखते हैं वो भी बुरे हो सकते हैं. किन्तु इसका अर्थ ये तो बिलकुल नही है कि सभी बुद्धिजीवी बुरे हैं, अथवा बुद्धिजीवी होना (बुद्धिजीवीवाद) बुरी बात है.
जिस दिन वास्तविक ब्राह्मणवाद को बढ़ावा मिल जाएगा उस दिन से सामाजिक व्यवस्था सुधर जाएगी। जातिवाद के पृष्ठभूमि में होने वाले सभी दुर्व्यवहार समाप्त हो जाएंगे।

बहुत दु:खद बात है कि मेरे एक मित्र जो कि जन्मानुसार अनुसूचित जाति से हैं और लखनऊ के एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में शिक्षक हैं, उनके साथ अभी भी भेद भाव होता है. कई सारे उनके सहशिक्षक जो कि ऊंची जाति से हैं वो उनके साथ खाने की मेज पर नहीं बैठते, उनसे खाने की कोई भी वस्तु स्वीकार नही करते (हाँ, अपनी तरफ से कुछ खाने की वास्तु अवश्य देते हैं कभी कभी), दूसरों को ये कहते हैं कि "वो छोटी जाति का है उसके साथ न बैठो".

ये नीच व्यवहार शिक्षक होते हुए बहुत से लोग कर रहे हैं, अत्यंत दुःखदायी है ये.

जो मनुष्य दूसरे मनुष्य का सम्मान नहीं कर सकता वो किसी भी प्रकार से ऊंचा नहीं है, अपितु स्वयं ही उच्च कोटि के घृणा का पात्र है. 

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