Saturday, October 8, 2016

कौन है राष्ट्रभक्त और कौन नहीं? Who is a real patriot?

एक राजनेता जनता के सामने पोलिटिकल वक्तव्य नहीं देगा तो क्या बेडरूम टॉक करेगा? जो बातें हमारी राष्ट्रवादी  पार्टी (बीजेपी) नहीं पूछ पायी पीडीपी से, वो बात आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री कपिल मिश्र ने पूछ लिया।
कुछ स्वघोषित राष्ट्रवादी समाचार चैनलों ने इस विडियो का छोटा सा अंश दिखाया और ये  सिद्ध करने का प्रयास किया कि कपिल मिश्र ने माहौल बिगाड़ा उस कांफ्रेंस का। यही काम किसी भाजपा नेता ने किया होता तो न्यूज़ हेडलाइन होती कि "फलाना मंच से भाजपा नेता ने आतंकवादियों को समर्थन करने वाले दल की मुखिया को ललकारा।" अर्णब गोस्वामी कदाचित कुछ इस प्रकार की बातें करते कि "देश के सैनिक जब शहीद हो रहे हों तब क्या एक बड़े (टूरिज्म) सम्मलेन में ये बातें नहीं होनी चाहिए?" समस्या ये है, कि अधिकतर मुखर मीडिया वही बोलती हैं जो उनकी प्रिय पोलिटिकल पार्टी के पक्ष में होता है, भले ही वो सही हो या गलत।

अब इतने दोगले हैं कुछ मीडिया हाउस कि एक तरफ वो बोलते हैं कि अरविन्द केजरीवाल ने जो बोला ("पाकिस्तान के झूठ प्रोपेगैंडा का मोदी जी करारा जवाब दें...") उससे पाकिस्तानी न्यूज़ पेपरों का ऑब्जेक्टिव हल हुआ, और ये पाकिस्तान के पक्ष में था। अर्णब ने तो पाकिस्तानी समाचार पत्रों की प्रतियां दिखाई, और हैडलाइन दिखाई।उन्होंने ये दिखाने का प्रयास किया कि देखो किस तरह केजरीवाल के स्टेटमेंट को "सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगना" समझा जा रहा है पाकिस्तानी मीडिया में।  दूसरी तरफ अर्नब स्वयं ये कहते हैं कि पाकिस्तानियों को सबूत नहीं देना चाहिए, क्योंकि उनको सबूत देने से कोई फायदा नहीं, पाकिस्तानियों की बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, वो दुनिया को कुछ भी झूठ कहते रहते हैं। अरे भाई, एक तरफ आप पाकिस्तान और उसकी मीडिया की बातों को ना मानने की बात करते हैं, दूसरी तरफ आप स्वयं पाकिस्तान के मीडिया के द्वारा किये गए केजरीवाल के वक्तव्य की व्याख्या को सही मानते हैं, और ज़ोर-ज़ोर से उसका प्रचार करते हैं?

नेशन वांट्स टू नो, टुनाइट, कि अर्नब बाबू आप किसके साथ हैं? - भारत के, या पाकिस्तान के, या फिर जो बातें केजरीवाल और अन्य एनडीए दलों के विरूद्ध हो सिर्फ उसके?

आप के जैसे तर्क यदि विपक्षी भी देने लगे तो उनके अनुसार बीजेपी के जिन नेताओं और मंत्रियों ने केजरीवाल के वक्तव्य को "सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगना" चिल्ला कर बोला है, वो  देशद्रोही माने जाएंगे क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तानी मीडिया के व्याख्याओं का समर्थन किया है?

अब आप बताइये कि क्या आप गद्दार हैं जिसने पाकिस्तानी मीडिया के हित में जाने वाले व्याख्या का समर्थन किया और अप्रत्यक्ष रूप से इस बात का ज़ोर शोर से प्रचार किया कि भारत के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक पर भरोसा नहीं किया जा रहा? यदि आप देशभक्त न्यूज़ चैनल बनने का प्रयास कर रहे थे तो इस बात पर ज़ोर देते कि भारत के भीतर नेताओं  ने पकिस्तान को झूठा कहा। ऐसा करते तो कदाचित भारत को और मजबूती मिलती, हमारे सैनिकों को और प्रोत्साहना मिलती। किन्तु आप तो वही करेंगे जिसमें आपकी प्रिय पार्टी का लाभ हो। केजरीवाल के वक्तव्य को राष्ट्र विरोधी बता दो जिससे की बहुत से वोट पंजाब में आम आदमी पार्टी के कम हो जाएँ।

थोड़ी देर के लिए मान लें कि केजरीवाल ने कुछ गलत बोल दिया है और वो गद्दार है, लेकिन यदि एक गद्दार की बात पर नेशनल मीडिया ज़ोर-ज़ोर डिस्कशन करती है, तो क्या दुश्मनों के एजेंडे का प्रचार नहीं होता? अगर कोई गद्दार चिल्लाता है तो उसकी बातों का प्रचार नहीं किया जाता, उसे सजा दी जाती है। हालांकि केजरीवाल भारत में एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं, वो जनतंत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री बने हैं, उन्हें आधारहीन तरीकों से "देशद्रोही" जैसी उपाधि देना स्वयं जनतंत्र विरोधी कृत्य है।

लेकिन जिसे देश हित से अधिक टीआरपी और एक-पार्टी-भक्ति प्रिय है, वो हर उस बात को ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाएगा, और इस तरह से चिल्लाएगा, जिससे उनके इष्ट-पार्टी का वोट बैंक बढ़े।

Links: कपिल मिश्र का विडियो
https://www.youtube.com/watch?v=08Bmv_2E-14

No comments:

Post a Comment