2019 के केंद्र के आम चुनाव या 2020 के दिल्ली राज्य के चुनाव या फिर आने वाले पंजाब, बंगाल, उत्तर प्रदेश आदि के चुनाव। ये जनतंत्र के द्वारा प्रस्तुत किये गए नागरिकों के लिए परिक्षा-पर्व होते हैं। क्या आप तैयार हैं परिक्षा के लिए? क्या आप इसकी तयारी कर रहे हैं? क्या तैयारी कर रहे हैं आप? कहीं आप निमान्तिक में से तो कुछ नहीं कर रहे हैं:
१. अपनी प्रिय पार्टी की गलतियों को ना देखना।
२. अपनी प्रिय पार्टी के काम को बिना जांचे परखे ही अच्छा समझना।
३. अपनी प्रिय पार्टी के प्रवक्ताओं द्वारा जो कुछ भी बोला गया हो उसपर बिना जांचे परखे विश्वास कर लेना।
४. अपनी प्रिय पार्टी पार्टी के विरुद्ध जो भी पार्टी हैं उनपर बिना जांचे परखे अविश्वास करते रहना और उनके प्रवक्ताओं की बातों को बिना जांचे परखे गलत मान लेना।
५. अपनी प्रिय पार्टी के कार्यों पर नज़र ना रखना।
६. अपनी प्रिय पार्टी को छोड़कर किसी अन्य पार्टी के कार्यों पर नज़र ना रखना।
७. अपनी प्रिय पार्टी को छोड़कर किसी अन्य पार्टी के विचारों को ना समझना।
८. अपने संविधान को ना समझना।
९. हर पार्टियों के इतिहास और वर्तमान के सिद्धांतों को ना आंकना।
१०. ये मान कर चलना कि आपका वोट मात्र एक ही पार्टी को जा सकता है, चाहे जो भी हो जाए।
११. अपना मतदाता कार्ड ना होने पर भी उसके बारे में कुछ न करना।
१२. अपने बच्चों और उनके बच्चों के भविष्य के बारे में ना सोचना।
अगर आप इनमें से कुछ भी कर रहे हैं तो कृपया "जय हिन्द" या "भारत माता की जय" में जो "जय" शब्द का अर्थ है, उसके बारे में विचार करिये और ये समझने का प्रयास करिये कि आप "जय" में सहयोग कर रहे हैं, या "पराजय" में।
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